STORYMIRROR

Ravi Ranjan Goswami

Abstract

4  

Ravi Ranjan Goswami

Abstract

सादा जुबान

सादा जुबान

1 min
245

एक का फिजूल दूजे के सवालाख का।

ये समझ लें तो मामला दस लाख का।


मोहब्बत के मामले में शर्ते क्यों हैं ?

बिना शर्त करता है आदमी कमाल का।


बड़े बड़े लब्ज हैं हर एक जुबान में।

तीर दिल में उतर जायेगा सादा जुबान का। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract