रोमांच( बछेंद्री पाल)
रोमांच( बछेंद्री पाल)
हिमालय की बेटी भारत की वो शान नाम था उसका बछेंद्री पाल
पहाड़ों से थी उसकी दोस्ती, हिम्मत, धैर्य से लेती वो काम
उत्तराखंड राज्य से थी, उत्तरकाशी जिले में नकु री गाँव में था उसका निवास स्थान
पाँच भाई - बहन और माता-पिता से बना उसका घर परिवार
M.A, Bed की शिक्षा ली खेल कूद में उसकी रुचि करती देश का नाम
बचपन में पत्थर के कटाव पर पैर रख चढ़ ती वह पर्वत, जीवन में जिसके रहा संघर्ष
मनोबल जिसका बड़ा हो, आत्मविश्वास से जो भरा हो बछेंद्री ने पर्वतारोही बनने का सपना जो साकार किया करते करते नित दिन अभ्यास
धीर, गंभीर थी एवरेस्ट को फतह करती अपने सपने को सच व साकार
मेधावी, प्रतिभाशाली थी जीवन की चुनौतियों का सामना कर रहती ऊर्जावान
1982 में गंगोत्री, सदानीरा पर चढ़ आशा अनुरूप परीणाम प्राप्त हुआ
ब्रिगेडियर ज्ञान सिंघ ने नौकरी दी instructor का पद सम्भाला
23 मे 1984 को सागर माथा (एवरेस्ट) पर भारत का तिरंगा लहरा उसने भारत का यश बढ़ाया
अर्जुन, पद्मश्री, लेडीज ग्रुप ऑफ अवार्ड से सम्मानित भारत देश का गौरव बढ़ाया
23 मई एवरेस्ट चोटी पर पहुंच तिरंगा लहराया, अपनी कामयाबी पर पिता किशन,
माता हंसा और ईश्वर को किया याद
ऊंचाई को छूकर लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी एवरेस्ट माइ जर्नी टू दी टॉप एक शिक्षक संलग्न से ओत प्रोत बनी
चुनौती का सामना कर विश्वास रख अपने सपनों को सच कर एक मुकाम बनाया
दुर्गम क्षेत्र में प्रथम महिला अभियान से जाना जाता टाटा स्टील में कार्यरत
रोमांचक अभियानो का परीक्षण जहाँ दिया जाता
बछेंद्री पाल जैसी महिला पर भारत देश को है गर्व, युगों युगों तक इनका नाम सम्मान से लिया जाता
समर्पित मेरी कविता एसी पर्वतारोही को जो कहलाये बछेंद्री पाल ,किया जिसने भारत का रोशन नाम ।
