"रमजान"
"रमजान"
पाक महीना होता है, यह रमजान
दान-पुण्य, ज़कात है, इसकी जान
जो भी करते है, इसमें नेक काम
खुदा देता उनको जन्नत में स्थान
मुबारक हो सबको, पाक रमजान
ख़ुदा की इबादत करते है, तमाम
झूठ, छल की छोड़ देते है, मुस्कान
रब की बंदगी में लगाते जो ध्यान
गुनाहों से तौबा करती है, अवाम
खुदा की रहमत माह है, रमजान
वतन सलामत रहे, चाहे हम न रहे
यह दुआ करते सब ही मुसलमान
चाहे चली जाये, क्यों न यह जान
हमारी रुह में बसा है, हिन्दुस्तान
रमजान, झुठ पर है, सत्य फरमान
अंधेरे पर है, रोशनी का निशान
चाहे कितने ही गिला-शिकवा हो
हिंदू, मुस्लिम सब भाई है, तमाम
सबकी रगों में एक ही खूँ बहता,
उस खूँ का नाम है, बस हिंदुस्तान
इतना पाक माह होता है, रमजान
शूल से भी खिल जाते, फूल तमाम
गर दिल से करे इबादत करे इंसान
आंख में हो जिसके पश्चाताप आग
खुदा माफ कर देता, गुनाह तमाम
रब का होता है, उनके साथ जहान
जो नेक कर्म के है, अब्दुल कलाम
जो ईमान पर चलने में लगाते, जान
खुदा की नजर में वो ही है, इंसान
बाकी बिना सिंग, पूंछ पशु इंसान
रब की बंदगी लगा दो सब जान
रब कयामत रात, देगा, मुस्कान।
