STORYMIRROR

Abhilasha Deshpande

Romance

4  

Abhilasha Deshpande

Romance

रिश्ता

रिश्ता

1 min
262

तेरा मेरा रिश्ता

इश्वर भी समझ पाया 

इसलिये उसने ये जाल बिछा़या।


दिल के किसी कोने मे है 

तस्वीर तेरी उस तस्वीर से 

कर लेते है दीदार हम।


दिल का क्या है वो 

अक्सर तुट जाता है

सुहाने सपने जैसा वो

हमसे रुठ जाता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Abhilasha Deshpande

Similar hindi poem from Romance