STORYMIRROR

Ram Chandar Azad

Drama

3  

Ram Chandar Azad

Drama

प्यारी माँ

प्यारी माँ

1 min
281

माँ तो केवल माँ होती है

बच्चे की सब कुछ होती है।

शिशु के भाव सहज मन से,

जो पल भर में ही पढ़ लेती है।


बच्चे बनकर कभी खेलती,

गुस्से, नख़रे साथ झेलती।

उसके सुर में अपने सुर को,

तुतला करके गीत बोलती।


जब रूठे वह उसे मनाती।

वह परियों की कथा सुनाती।

नींद नहीं आती जब उसको,

लोरी गाकर उसे सुलाती।


कभी कभी रोने लगता जब,

माँ को चैन नहीं मिलता तब।

काम काज तजकर कहती वो,

चुप हो जा राजा बेटे अब।


तुम बादाल अगल दाना तो

मेले लिए थिलौने लाना।

हाँ, हाँ, हाँ मैं सब लाऊँगी।

चुप हो जा चल खा ले खाना।


माँ ने खाना उसे खिलाया।

बाहों में फिर उसे झुलाया।

माँ का दिल भी झूम उठा,

जब बच्चा हँसा और मुस्काया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama