प्यार का इजहार
प्यार का इजहार
अगर प्यार करते हो तो इजहार कीजिए
इश्क ए दरिया को तैरकर पार कीजिए
ये इश्क है जाना, कोई मैदान ए जंग नहीं
तिरछी निगाहों से तो ना ऐसे वार कीजिए
दिल ही दिल में कब तक चाहते रहोगे तुम
खुलकर कभी तो इश्क का इकरार कीजिए
पाप पुण्य का हिसाब होता रहेगा फिर कभी
अगर इश्क गुनाह है तो ये सरे बाजार कीजिए
लबों से गर ना कह सको आंखों से ही कह दो
ऐसे ना बैठे रहो, कोशिश तो एक बार कीजिए।

