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Manisha Awekar

Abstract

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Manisha Awekar

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प्रियसखी प्रतिभा

प्रियसखी प्रतिभा

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प्रियसखी प्रतिभा

हल्की सी लहर सी आती

बार बार आके मुस्कुराती

कभी हल्कासा झोका लेती

कभी गगन के पास जाती  ( 1)


अचानक मन में कभी आती

और प्रसन्नसी मुस्कुराती

मेरा मन खिलखिलाती

हल्का सुगंध मन में लहराती (2)


जब मैं करुँ आराधना

तब उसका शुरु रुठना

रुठनेपर मुँह फेरना

सब मैंने जाना पहचाना  (3)


कभी अधखुली नींद में आती

झलक कानों में गुनगुनाती

उसके अस्तित्वसे खुश होती

इतनी की फूले न समाती  (4)


आने से उसके आएँ बहार

सभी जगह वसंत न्योछार

खुश प्रियसखी प्रतिभा पर

साथ देगी ना जीवन भर !


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