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VIPIN KUMAR TYAGI

Abstract

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VIPIN KUMAR TYAGI

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प्रेमी संग प्रेमिका

प्रेमी संग प्रेमिका

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प्रेमिका अपना घर बार

छोड़ प्रेमी को अपना है लेती,

अपना सब कुछ समर्पण कर पूर्ण

रूप से प्रेमी की हो है जाती,


अपने माता पिता जिनकी

आंख का सितारा वह है होती,

उन्हें भी छोड़ कर प्रेमी के

घर चली है जाती,


अपने भाई बहन जिन्हें वह

प्राणों से भी ज्यादा वह है चाहती,

उन्हें भी छोड़ प्रेमी की वह हो है जाती,

उस घर, गली तथा शहर,


जिसे वह दिल से है चाहती,

उसे छोड़ प्रेमी के शहर व घर चली है जाती,

अपनी सहेलियों अपने दोस्तो को भी छोड़,

वह प्रेमी की होकर रह है जाती,


प्रेमी के परिवार रिश्तेदार,

भाई बहन व माता पिता को भी वह अपना है लेती,

प्रेमी को ही अपना कर अपना वहीं समझ है लेती,

प्रेमिका अपना घर बार छोड़ प्रेमी को अपना है लेती।


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