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Nivedita Chakravorty

Abstract

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Nivedita Chakravorty

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प्रेम

प्रेम

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प्रेम ही जीवन है

किंतु मृत्यु प्रेम सिखाती है

जब निष्प्राण हो जाती है देह

भस्म हो जाता है कण - कण

स्मृतियों को जब खरोंचते हो तुम चुपचाप

सुखद स्मृतियाँ, एक साथ बिताए पल

और जब वो पल बहुत ज्यादा नहीं मिल पाते

तब तुमको होती है अनुभूति

क्यों नहीं संबंधों में सुखद पल उगाते हो

प्रेम से भरे हुए पल

खिलखिलाती हँसी

शब्दों की चहक

हाथों का स्पर्श

विरासत में बस यही सौंप कर जाएंगे हम

बाकी सब तो माटी है

युगों की परिपाटी है



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