प्रेम जो कोई करता रहेगा तो
प्रेम जो कोई करता रहेगा तो
प्रेम
किसी मनुष्य के दिल में
होना चाहिए या कि
नहीं होना चाहिए
आज मैं खुद से यह सवाल पूछती हूं और
मेरे अंतर्मन तुम इस
उलझे हुए प्रश्न का एक सुलझा हुआ सा ही
कोई अच्छा सा और उपयुक्त सा
प्रतीत होता उत्तर खोजने में मेरा
सहयोग करना
कोशिश करना कि निराशा मेरे हाथ न
लगे
प्रेम की मात्रा कितनी होनी चाहिए
क्या किसी के दिल में
प्रेम का एक समुंदर होना चाहिए
प्रेमी को उसमें डूब जाना चाहिए या
उससे पार पा लेना चाहिए
प्रेम का दिल में समुंदर हो
कोई नदी हो
नाला हो या तालाब हो
या
यह कोई झरना हो
पहाड़ियों से फूटता
आकार में छोटा, बड़ा या फिर
मध्यम
प्रेम पानी सा बहता हो या
कहीं ठहरा हुआ
रुका है जैसे
कुएं की सरहदों के बीच कैद
उसका पानी
प्रेम पानी की तरह शीतल होना
चाहिए या
इसे पानी की तरह होना ही
नहीं चाहिए
इसे अग्नि की प्रचंड एक ज्वाला की
तरह जलता हुआ
लपकता हुआ और फैलता हुआ
होना चाहिए
प्रेम को मैं कैसे परिभाषित करूं
प्रेम का भंडार दिल में
अपार होने से
वह व्यक्ति उसके बोझ तले
दब नहीं जायेगा
वह प्रेम का राग अलापते अलापते ही
मर जायेगा
जीवन के अंतिम पड़ाव पर
कुछ पायेगा
उम्र भर सबको प्यार करेगा
आखिर में शायद सबकी
मार, दुत्कार और
गाली ही खायेगा
प्रेम जिसके पर हृदय में हो
उसके जन्म लेने के पहले क्षण से ही
वह प्रेम से कभी छुटकारा पा
सकेगा
मुझे लगता है शायद नहीं
उसके प्यार को कभी कोई
समझ पायेगा
मेरा जवाब फिर है 'नहीं'
उसके प्रेम के बंधन में कभी
कोई बंध पायेगा
'नहीं नहीं नहीं'
वह प्रेम के जोंक से कभी
मुक्त हो पायेगा
संपूर्ण मानव जाति या सृष्टि से
प्यार करना छोड़ पायेगा
शायद कभी नहीं
प्रेम जो कोई करता रहेगा
अपनी आखिरी सांस तक
वह कोई भौतिक सुख पाये या
न पाये
प्रेम करता रहेगा तो
प्रेम के बारे में एक
अभूतपूर्व ज्ञान तो अवश्य
अर्जित कर पायेगा और
प्रेम से परिपूर्ण
प्रेम की पराकाष्ठा
प्रेम की प्रतिमूर्ति
प्रेम के प्रतीक चिन्ह
प्रेम के रचनाकार
भगवान
इस जग के पालनहार
इस सृष्टि के रचयिता
इस संपूर्ण जनमानस के प्रणेता
को तो अवश्य प्राप्त कर पायेगा।
