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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

पोष की रात्रि।

पोष की रात्रि।

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वो सर्द रातों में हमारा विवाह हुआ था, 

प्रेम विवाह पोष की रात्रि को हुआ था। 

बड़े ही धूमधाम से विवाह हमारा हुआ, 

नाचते और गाते हुए बारात आगे बढ़ी। 


सर्दी में हिल स्टेशन दोनों घूमने गए तो, 

घूमने के दौरान बर्फ़ के तूफ़ान में फंसे। 

सर्दी लगी तो मुझसे लिपट कर सो गए, 

आग और पानी दोबारा से एक हो गए।


अगले दिन तबीयत खराब बहाना कर, 

उस दिन होटल में अकेले ही रूक गए। 

हम तो वापिस पास में ऑफिस थे गए, 

बर्फ़ के तूफ़ान में होटल ना पहुँच सकें। 


कुछ दिन के बाद बर्फ़ का तूफ़ान थमा, 

हम वापिस बिना बताये होटल थे पहुंचे। 

जो देखा होटल पहुँच कर हमने नज़ारा, 

हमारे पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई। 


बेवफ़ा को किसी और की बाहों में देखा, 

टूटे दिल के टुकड़े करके वो छोड़ के गए। 

सदा के लिए प्यार हमारा बेचकर दूर वो, 

हमें तन्हा छोड़ कर ग़ैर के साथ चले गए।


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