पन्नों पर ढलती तुम
पन्नों पर ढलती तुम
तू ठहर ठहर कर बरसती रही
मैं रुक रुक कर तुझ पर लिखता गया
तू बिन आवाज़ के रोती रही
मैं आवाज़ कर तुझे पन्ने पर उतारता गया
तू शांत सी बहकती हुई बहक गई
मैं संभल कर तुझे निहारता गया
तू बेरूखी से मुझे ख़फ़ा कर
मैं चुपी से तुझे मनाता गया
तू छुप छुप कर मुझे तकती रही
मैं मुस्कराते हुए तुझे पर किताब लिखता रहा।
