Kumar Kishan
Inspirational
एक वृक्ष की तरह होते हैं पिता
अपनी अभिलाषाओं को दबाकर
बेटे-बेटियों की खुशियां चाहते हैं पिता।
एक पिता का कुटुम्ब ही उसका
संसार होता है और
उसी संसार में अपना प्रेम
समर्पित कर देते हैं पिता।
इसलिए तो देवतुल्य होते हैं पिता।
कविता. ...।
अल्फाज... देश...
मेरे अल्फाज
चलता जा मुसाफ...
उदासी भरे दिन...
यादें
मैं बादल दीवा...
नव वर्ष का स्...
सूर्य लेकर आया यह संदेश छोड़ो आलस हो जाओ उम्मीद से अब लैस। सूर्य लेकर आया यह संदेश छोड़ो आलस हो जाओ उम्मीद से अब लैस।
पल पल उसे बढ़ता देखूंगा एक परिवार के सदस्य सा ही मान दूंगा पल पल उसे बढ़ता देखूंगा एक परिवार के सदस्य सा ही मान दूंगा
पहले था मैं अस्वस्थ रोता रहता था। पहले था मैं अस्वस्थ रोता रहता था।
सिलसिला यूँ ही चलता रहे ज़िन्दगी भर सब रंग उतर जाये प्यार का रंग उतरे नहीं सिलसिला यूँ ही चलता रहे ज़िन्दगी भर सब रंग उतर जाये प्यार का रंग उतरे...
नवजीवन का नवसंकल्प लिए नई ऊर्जा ,नव विकल्प लिए। नवजीवन का नवसंकल्प लिए नई ऊर्जा ,नव विकल्प लिए।
ख्वाहिशों के आसमां पर, चांद ,तारों से लिखती वह तदबीर मेरी, ख्वाहिशों के आसमां पर, चांद ,तारों से लिखती वह तदबीर मेरी,
आपकी जोड़ी बनी रहे, सदियों तक गहरी मुबारक हो आपको सालगिरह, सुनहरी। आपकी जोड़ी बनी रहे, सदियों तक गहरी मुबारक हो आपको सालगिरह, सुनहरी।
स्नेह की फुहार से अन्तर्मन तक नहला देतीं और प्रेरित करती जीवन को अंक में भर लेने को स्नेह की फुहार से अन्तर्मन तक नहला देतीं और प्रेरित करती जीवन को अंक मे...
हृदय का अंधियारा मिटा सके न कोई और केवल खुद का मनोबल ही कर सके हृदय का अंधियारा मिटा सके न कोई और केवल खुद का मनोबल ही कर सके
मैं खुद में मशगूल हूं,गुलशन में लगा इक फूल हूं। मैं खुद में मशगूल हूं,गुलशन में लगा इक फूल हूं।
हर खेतों में हरियाली अंगड़ाई लेती है, अब भी हर माँ काजल का टीका लगाती है, हर खेतों में हरियाली अंगड़ाई लेती है, अब भी हर माँ काजल का टीका लगाती है,
विश्व अर्थव्यवस्था की आवश्यकता है मजदूर। विश्व अर्थव्यवस्था की आवश्यकता है मजदूर।
सपनों को साकार करने के लिए प्रतिदिन आगे मैं बढ़ती हूं। सपनों को साकार करने के लिए प्रतिदिन आगे मैं बढ़ती हूं।
दोनों ही दशा में वो सूरज है और यही उसको देती तृप्ति है, दोनों ही दशा में वो सूरज है और यही उसको देती तृप्ति है,
ना पिघलेंगे, ना टूटेंगे, वक्त पड़े तो वतन पर हो जाएंगे कुर्बान। ना पिघलेंगे, ना टूटेंगे, वक्त पड़े तो वतन पर हो जाएंगे कुर्बान।
मां बच्चों को आगे बढ़ने में सहायता है करती, मां बच्चों को सामाजिक शिक्षा भी है देती, मां बच्चों को आगे बढ़ने में सहायता है करती, मां बच्चों को सामाजिक शिक्षा भी है द...
ना लोगों की भीड़ चाहिए, ना झूठा व्यवहार चाहिए। ना लोगों की भीड़ चाहिए, ना झूठा व्यवहार चाहिए।
शक्ति स्वरूपा ये है नारी की पहचान नारी शक्ति को समर्पित। शक्ति स्वरूपा ये है नारी की पहचान नारी शक्ति को समर्पित।
सुकून मुस्कुराहट ही देती है, माथे की शिकन की हलचल में सुकून मुस्कुराहट ही देती है, माथे की शिकन की हलचल में
देश भी खुशहाल होगा, विश्व भी सौहार्द पूर्ण होगा। देश भी खुशहाल होगा, विश्व भी सौहार्द पूर्ण होगा।