Kumar Kishan
Inspirational
एक वृक्ष की तरह होते हैं पिता
अपनी अभिलाषाओं को दबाकर
बेटे-बेटियों की खुशियां चाहते हैं पिता।
एक पिता का कुटुम्ब ही उसका
संसार होता है और
उसी संसार में अपना प्रेम
समर्पित कर देते हैं पिता।
इसलिए तो देवतुल्य होते हैं पिता।
कविता. ...।
अल्फाज... देश...
मेरे अल्फाज
चलता जा मुसाफ...
उदासी भरे दिन...
यादें
मैं बादल दीवा...
नव वर्ष का स्...
मैं जीवन की आशा हूँ मैं सत्य की परिभाषा हूँ मैं भारत हूँ, मैं भारत हूँ मैं जीवन की आशा हूँ मैं सत्य की परिभाषा हूँ मैं भारत हूँ, मैं भारत हूँ
सबसे छोटे लड़के ने कुछ कहे बिना ही अपने रोटी को उस आगंतुक को दे दिया। सबसे छोटे लड़के ने कुछ कहे बिना ही अपने रोटी को उस आगंतुक को दे दिया।
बाँट दिया इस धरती को, चाँद सितारों का क्या होगा? नदियों के कुछ नाम रखे,बहती धारों का । बाँट दिया इस धरती को, चाँद सितारों का क्या होगा? नदियों के कुछ नाम रखे,बहती ध...
अलंकार, चार-चाँद लगाते, मुहावरे करते संपूर्ण हैं। अलंकार, चार-चाँद लगाते, मुहावरे करते संपूर्ण हैं।
पर धीरे-धीरे ये संकीर्णतायें अस्तित्वहीन हो जाएगी। पर धीरे-धीरे ये संकीर्णतायें अस्तित्वहीन हो जाएगी।
अच्छा है अब तो सँभल जाइए सोचिए, सोचिए और सोचकर सोचिए! अच्छा है अब तो सँभल जाइए सोचिए, सोचिए और सोचकर सोचिए!
हां ! देखो तो सही, कोरोना कुचक्र से हर आदमी बच सकता है। हां ! देखो तो सही, कोरोना कुचक्र से हर आदमी बच सकता है।
अपनी छवि को सम्मान दिलाने के खातिर बना वही बस दुश्मन है, जिसने मुझे हद दिखलाई है। अपनी छवि को सम्मान दिलाने के खातिर बना वही बस दुश्मन है, जिसने मुझे हद दिखला...
रणभूमि वो कुरुक्षेत्र की क्या क्या उसने देखा था अति रथी भीष्म को भी विवश उसने देखा था। रणभूमि वो कुरुक्षेत्र की क्या क्या उसने देखा था अति रथी भीष्म को भी विवश उसने...
मैं भी हूँ एक बेटी का बाप, फिर भी गर्व से वो बताता होगा। मैं भी हूँ एक बेटी का बाप, फिर भी गर्व से वो बताता होगा।
सत्य क्या है? तथ्य या वास्तविकता के अनुरूप होने को सत्य कहते हैं । सत्य क्या है? तथ्य या वास्तविकता के अनुरूप होने को सत्य कहते हैं ।
तुझे पता ही ना चला ज़िन्दगी में दौड़ते दौड़ते तू कब ज़िन्दगी से ही दूर होती चली गई। तुझे पता ही ना चला ज़िन्दगी में दौड़ते दौड़ते तू कब ज़िन्दगी से ही दूर होती ...
शाहु विचारधारा का बहुजनों को करना पडेगा स्मरण। शाहु विचारधारा का बहुजनों को करना पडेगा स्मरण।
जब घुटनों में दर्द का अहसास हुआ तब पता चला की मैं उम्र के किस मोड़ पे खड़ी हूँ। जब घुटनों में दर्द का अहसास हुआ तब पता चला की मैं उम्र के किस मोड़ पे खड़ी हूँ...
प्रसूता अपनी आँखों में अनजाने रिश्तों में आत्मीयता देख रही थी ! प्रसूता अपनी आँखों में अनजाने रिश्तों में आत्मीयता देख रही थी !
वो पल वहीं रुक गया; हर जज़्बात वहीं जाकर टूट गया; मेरे आँसू वहीं ठहर गए। वो पल वहीं रुक गया; हर जज़्बात वहीं जाकर टूट गया; मेरे आँसू वहीं ठहर गए।
और आपदा में डटे रहना है, यह एक ही नारा गाएंगे। और आपदा में डटे रहना है, यह एक ही नारा गाएंगे।
जिनकी मुरादें अधूरी रह जाती, खुदा की उस पर रहमत है समझो।। जिनकी मुरादें अधूरी रह जाती, खुदा की उस पर रहमत है समझो।।
अपने प्यार, ममता और देखरेख से यूँ सब की ख़ास बन जाती हैं बेटियाँ, अपने प्यार, ममता और देखरेख से यूँ सब की ख़ास बन जाती हैं बेटियाँ,
ज़िन्दगी की डोर जब टूटने लगी थी जब हौसला बिखरने लगा था तार-तार हो। ज़िन्दगी की डोर जब टूटने लगी थी जब हौसला बिखरने लगा था तार-तार हो।