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shaanvi shanu

Abstract Inspirational

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shaanvi shanu

Abstract Inspirational

फूलों के जख्म

फूलों के जख्म

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नाम तो काँटों का ही लगेगा,

यही सोच कर

फूल भी कभी कभी जख्म दे जाते हैं।


बात नयनों की करें तो हो कर तिरछी,

कभी-कभी इशारों पर नचाते हैं ,


जिंदगी से किये तमाम वादों को दर किनार

कर, कुछ इंसान जिंदादिल हूं का राग अलापते हैं


जब प्रहलाद, मीरा, सीता को भी अपनी अग्निपरीक्षा अग्नि, विष,

और धरती में समा कर देनी पड़ती है।


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