STORYMIRROR

Kota rajdeep

Romance

2  

Kota rajdeep

Romance

फिरा करे

फिरा करे

1 min
245

एक ही अब आरज़ू रहे

की तेरा खत यूँ ही घूमता फिरे

खुद को कैसे छुपाऊ

खुदा भी जुबान लिए फिरे

कमबख्त रहे गर तू हाजिर

तेरे लम्हों को साथ लिए फिरे

अल्फ़ाज़ कुछ गीले गीले

तेरा हुस्न पन लिए फिरे

कोहरा सा छाया हुआ हर तरफ

परछाई मेरी न जाने कहाँ कहाँ फिरे

बरसातो की रुत जवान यूँ ही रहे

कुछ पल, हवा न जाने तूफान बन फिरे

हैसियत तेरी सुन की, मानो

मेरी खैरियत बेजुबान बन फिरे

लम्हे आज थम से गए की

हर पल उसे बिठाए फिरे

कोई भाषण के जरिए रोटी देना चाहे

वहाँ वह आंसू बहाए फिरे

कोई अच्छे से वहाँ सो रहा है,

तो यहां कोई जादू लिए फिरे

किसी को खूब नसीब हुआ ज़िन्दगी मैं

कोई उस पाने, बंदगी किए फिरे।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance