STORYMIRROR

Hardik Mahajan Hardik

Abstract

3  

Hardik Mahajan Hardik

Abstract

फिर

फिर

1 min
195

फिर एक नये रंग मंच पर,

बनती बिखरती दुनिया,


क़लम स्याह ओर पन्नों में

सिमट रहे जज़्बात।


फिर एक नयीं सोच के

साथ उद्देश्य होगा,


जीवन जिसका हर पल

उदय जीवन होगा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract