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Varsha Sharma

Abstract

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Varsha Sharma

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फागुन और मस्ती

फागुन और मस्ती

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आज सुनाऊं फाग में कुछ पते की बात

अच्छी लगे तो दे देना आप सब मिलकर दाद

जोगीरा सा रा रा रा

पहले कवि सम्मेलन में कवियत्री होती थी 4

आज देखो माहौल में कवियत्री ओं की भरमार

जोगीरा सा रा रा रा


पापा की परी होती हैं बेटियां जो लगाते हैं

स्टेटस आज कल तक गलियों में

कहते थे यह है मेरा माल

जोगीरा सा रा रा रा


एक फोन था घर में जो सबको जोड़ कर रखता था

अब तो जितने घर में मानस उतने मोबाइल यार

जोगीरा सा रा रा रा


ट्रंप आए दिल्ली में तो दिल्ली को चमकाया

मैं बेचारी सोचती रह गई हो आते हमारे गांव

जोगीरा सा रा रा रा


नारी दुर्गा नारी काली नारी को लक्ष्मी मानते

बलात्कारियों का फिर भी कर सकते नहीं इलाज

जोगीरा सा रा रा रा


अम्मा ने पढ़ने को भेजा था तुमको बाहर

तुमने कर्तव्य की इतिश्री कर ली लेटर लिखकर 4

जोगीरा सा रा रा रा


पहले घर के आगे लिखते थे स्वागत है श्रीमान

अब लिखा होता है भैया कुत्तों से सावधान

जोगीरा सा रा रा रा


आज नारी दिवस पर करती हूं यह फरियाद

कभी गलियों में ना लेना किसी की मां का नाम।

जोगीरा सा रा रा रा।


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