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Social Solver

Romance

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Social Solver

Romance

Old memories

Old memories

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क्यों कहते हो तुम सदा, 

कि दिल अभी भरा नहीं

ये ढलता सूरज, और हवाएं

कह रही की

शाम हुई, शाम हुई

सूरज जो ये ढल जाएगा, हो जाएगी 

रात यहीं, रात यहीं

रात हो गई तो, सूरज नहीं चाँद फ़िर नज़र आयेगा

मैं तो फिर भी मान जाऊँ, पर मन मेरा कैसे भर पायेगा

तुम से मिला हूँ, तब से मैं भूल गया हूँ दिन और रात

चलों अब छोड़ो जाने दो

समझो तुम मेरे हालात

दिल से जुड़े है हम दोनों

जुड़ा है दिल और जज्बात

जो दिल से दिल का रिश्ता है

टुटेगा कैसे ये यूँ ही

ढूँढो हमें अपने दिल में ज़रा

रहते हैं हम वही कहीं

जो हमें दिल बसायेगा

मन उसका वैसे ही ,भर जायेगा

 कहता हूं फ़िर भी मै यही

अभी ना जाओ छोड़कर

कि दिल अभी भरा... 

कहाँ चली गई तुम मुझे 

यहाँ ऐसे छोड़कर

मेरा दिल तोड़कर ,तोड़कर, 



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