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क्यों कहते हो तुम सदा, कि दिल अभी भरा नहीं ये ढलता सूरज, और हवाएं कह रही की क्यों कहते हो तुम सदा, कि दिल अभी भरा नहीं ये ढलता सूरज, और हवाएं कह रही की
रेशम के धागे, सुनो ज़रा मुझे क्या बतलाते हैं, उन पलों को जियो, जो समय के साथ कहीं धुंधले हो जाते हैं रेशम के धागे, सुनो ज़रा मुझे क्या बतलाते हैं, उन पलों को जियो, जो समय के साथ कही...