STORYMIRROR

Mihika Saraf

Tragedy

2  

Mihika Saraf

Tragedy

न्याय और तमाशा

न्याय और तमाशा

1 min
202

ये समाज तमाशा देखता रह जयेगा,

औरतों की अवाज़ दबाई जायेगी,

शर्मो समाज के पैरो तले,

अपने उड़ान भरने वाले पंख पिसवा दी जायेंगी,

मनीषा वाल्मीकि, और इंकी जैसी ही हज़ारो स्त्रियो को,

ये भारत न्याय न दे पाएगा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy