STORYMIRROR

NOOR E ISHAL

Inspirational

4  

NOOR E ISHAL

Inspirational

नन्हीं उम्मीदें

नन्हीं उम्मीदें

1 min
2

ज़िंदगी के उलझे सुलझे धागे और नन्ही उम्मीदें
दिल ख़फ़ा सा है उसपे तू सम्भाले क्यूँ सारी यादें
                     

 बेमौसम पतझड़ तुझे कैसा लगता है ज़रा बता

आँख मिचौली खेलकर अब और ना मुझे सता

चंद कदम जो तू साथ दे मेरा तो बात बन जाये
मान मेरा कहना कि तेरी मेरी और ना ठन जाये
                     

वक़्त की मझधार से टूटी नाव ज़िद पे आ गयी

देख तेरी बेरुखी ये हम छोड़कर ख़ुद पे आ गयी

ज़िंदगी की गिरहें क्यूँ सुलझानी मुश्किल हो गयीं
ना जाने कहाँ ख़्वाबों की अच्छी ताबीरें सो गयीं
                    

सुनती हूँ अक्सर तू अच्छा तो कभी बुरा होता है

जो तेरी करते नहीं कदर तू उनसे ख़फ़ा होता है

सबक जीने के सबको पढ़ाता तू अपने ही ढंग में
तेरी चाल ना समझे कोई रंग लेता तू अपने रंग में
                   

ए वक़्त बता ना और कितने पाठ पढ़ाने बाकी हैं

हैरां हूँ सोच के और कितने हुनर दिखाने बाकी हैं

Noor E Ishal



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational