STORYMIRROR

Sudhir Srivastava

Abstract

4  

Sudhir Srivastava

Abstract

नन्हीं किरण

नन्हीं किरण

1 min
399

भोर में निखरती बिखरती किरणें

धीरे धीरे अपना आकार बढ़ाती

साम्राज्य फैलाती चमकती है जब


तब चहुंओर फैलता है अमिट प्रकाश

बिना भेदभाव सबको उर्जा संग 

रोशनी देता है नन्हीं किरणों का जाल।


आनंद से भर जाता जगत

उत्साह उमंग और नव विश्वास संग

शुरू हो जाती जन जन की 


दैनिक कार्यवाही मनोयोग से

नन्हीं किरण को धन्यवाद के साथ

उसके विश्राम को जाने तक। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract