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himanee bisht

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4.6  

himanee bisht

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नमन

नमन

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कुर्बान हुए जो अपने वतन के खातिर

कभी उन्हें भी नमन कर लिया करो !

तपती धूप, जाड़े की ठंड, तूफान एवं बरसते

बादलों के नीचे खड़े उस जवान को

कभी दिल से धन्यवाद तो कर लिया करो !


उस मां की कोख, जो सुनी रह गई है,

उसे कभी दिल से सलाम तो कर लिया करो !

खुशनसीब है वह पिता जिसके अंश का लहू

देश के काम था आया !


ए दोस्तो, कभी उस पिता के छुपे आंसुओं को

पोंछ तो लिया करो !

शहीद, दोस्त के सूनेपन को

कभी महसूस तो कर लिया करो !


रक्षाबंधन के पर्व में आए उस बहन की

आंख में आए आंसुओं की इज्जत तो कर लिया करो !

उस शहीद की राख के हर कण में बसे

उस पत्नी के दुख को पूछ कर तो देख लिया करो !


उस शहीद के छोटे भाई की हिम्मत का

सहारा तो बन के देख लिया करो !

कभी दिल से उनके उस लहू को नमन तो कर लिया करो !


उनकी इस जीत, वतन की रक्षा एवं वतन के

लहराते तिरंगे पर रोशनी डाल कर तो देख लिया करो !

अपने नव जीवन तथा उनकी थमी सांसों को

झुककर सलाम तो कर लिया करो !


ऐ दोस्त, हर "शहीदी दिवस" पर

उस शहीद और सरहद पर खड़े जवान को

जय हिन्द कहकर नमन तो कर लिया करो !               


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