STORYMIRROR

Deepti Khanna

Abstract

2  

Deepti Khanna

Abstract

नदी

नदी

1 min
180

माता समान है तेरा आंचल 

रत्नगर्भा हो तट,

जहाँ से बहती तेरी धारा।


तेरे साथ सुख-दुख सब हमने बांटा,

जीवन और अंतिम यात्रा का

गोता तुझ में ही लगाया।


तूने भी सब ,हमारे सारे दोष धोकर, 

हमें पातक से मुक्त कराया।


हम तुच्छ प्राणी क्या,

देव भी तुझे प्रणाम करते हैं,

इसलिए तुझे स्वर्ग से धरती पर

लाने के लिए तपस्या करते हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract