STORYMIRROR

Harshmani kothiyal

Inspirational Others

4  

Harshmani kothiyal

Inspirational Others

नारी

नारी

1 min
465

नारी है तो मान है 

नारी है तो सम्मान है 

नारी से तो जग चला 

नारी से संसार बढ़ा


यह कैसी है प्रथा चली

अत्याचार सह रही

कभी कोख में ही मारते

कभी प्रताड़ना से ताड़ते


लक्ष्मी को तो पूजते

लक्ष्मी रूप है जो

उसको क्यों हो लूटते

हो रहा अधर्म है 

दिख रहा अंत है


लूट कर मान को

उसके सम्मान को

दिख रहा है खुश क्यों

छीन कर अभिमान को


रोएगा तो एक दिन

अपनों का ख्याल कर

कर रहा है ऐसा क्यों

अपने से सवाल कर


रूप वो मां का, रूप वो कलाई का

रूप वो प्यार का, रूप वो सच्चाई का

रूप है वो शक्ति का, रूप है वो भक्ति का

मान दे, सम्मान दे, उसको पहचान दे


जीत कर विश्वास को, साथ तेरा पाएगी

सपनों को पूरा करके वो दिखाएगी

देश के मान को, अपने सम्मान को

आगे ही बढ़ाएगी, कभी ना झुकायेगी


रोक दे अब तू यह अत्याचार

त्याग कर अब तो यह गलत विचार

खत्म हो जाएगा, नहीं तो तेरा यह संसार

क्योंकि नारी है तो मान है, नारी है तो सम्मान है

नारी से तो जग चला, नारी से संसार बढ़ा



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Harshmani kothiyal

नारी

नारी

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Inspirational