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Komal Soni

Inspirational

4.5  

Komal Soni

Inspirational

नारी हूँ मैं

नारी हूँ मैं

1 min
295



सुनो, शोषकों !

अब बहुत हुआ ! 

सदियों से सहती आयी हूँ वेदना ! 

दर्द में बहती आयी हूँ ,

खोकर चेतना ! 

पर अब नहीं , अब और नहीं,

वेदना की चित्कारें ! 

अब तो स्वाभिमान पुकारे !  

कि बदल जाएगी 

सृष्टि ही , 

परिवर्तित हो जाएगी , 

दृष्टि ही ! 

नारी हूँ मैं , 

कोई वेदना की सरोकार नहीं ..

महिषासुर मर्दनी हूँ मैं , 

कोमलांगी अवतार नहीं ! 

अब कोई वेदना न दे पाएगा , 

आत्मसम्मान न ले पाएगा ! 

गर किया दुस्साहस फ़िर भी , 

तो जीवन अमृत न पी पाएगा !! 



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