STORYMIRROR

VIKAS SHARMA

Romance

1  

VIKAS SHARMA

Romance

मुलाकात

मुलाकात

1 min
305

कुछ जो तुमसे कहना था, कह ना सके।

सुनना था, वो सुन नहीं पाए। पूछो क्यों?


सच बोलूं? ध्यान तुम्हारा कहीं और ही था,

मुझसे ज्यादा इस बात पर कि कमबख़्त,

ये लोग घूर क्यों रहे हैं हमको इस तरह। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from VIKAS SHARMA

Similar hindi poem from Romance