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VIKAS SHARMA

Romance

5.0  

VIKAS SHARMA

Romance

मुलाकात

मुलाकात

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304


कुछ जो तुमसे कहना था, कह ना सके।

सुनना था, वो सुन नहीं पाए। पूछो क्यों?


सच बोलूं? ध्यान तुम्हारा कहीं और ही था,

मुझसे ज्यादा इस बात पर कि कमबख़्त,

ये लोग घूर क्यों रहे हैं हमको इस तरह। 


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