मुझे याद नहीं
मुझे याद नहीं
मुझे याद नहीं
कौन-सी पहनी थी साड़ी
किस क्षेत्र मैं थे हम खड़े,
पर मुझे हमारे आलिंगन का
मिलन याद है।
कितनी थी रोशनी
कितना अंधकार,
प्रभात हुआ भी था या नही
मुझे कुछ भी याद नही।
किंतु मुझे तुम्हारा नाम याद हैं
संग बिताए वक्त
छुअन याद है
इत्र् याद है
यदि कहूँ कि ऋणबंधन याद है,
तुम्हारी मुस्कान- सांसो का मिलन
दो हथेलियों का वजन,
तो कया तुम्हें यक़ीन होगा ?
मुझे कुछ भी याद नहीं।

