STORYMIRROR

Kumar Ashish

Classics

3  

Kumar Ashish

Classics

मोहब्बत के ही रंग बरसें

मोहब्बत के ही रंग बरसें

1 min
231

सभी खुद को स्वयं रंग लो हुई बौछार होली में,

मिले सबको सफलताएँ न हो अब हार होली में।


मिटाकर नफरतें दिल से गले सबसे मिलो हँसकर,

मोहब्बत के ही रंग बरसें अब इस त्यौहार होली में।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics