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Ravi k.Pandit

Inspirational

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Ravi k.Pandit

Inspirational

मंजिल

मंजिल

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धूप में खड़ा ताक रहा 

दूर एक रास्ता 

एक मजदूर मजबूर

फिर चल दिया

बस मंजिल की ओर कहता हुआ 

मेरी मंजिल मेरी मंजिल


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