STORYMIRROR

Yogita Takatrao

Abstract

5.0  

Yogita Takatrao

Abstract

मन से मन की होली

मन से मन की होली

1 min
865


मन से मन की

होली खेले

रंग दे ना

मन को,


जो भी है

मन के

अंदर

रंग दे ना उनको,


एक छोटी सी

जिंदगी की

ख़्वाहिशों के

रंगों में रंग लो,


मन के कोरे से

कागज के

पन्नों को

रंग दो,


आओ जिंदगी

के हर एक

कोने को

रंग दो,


हो सकता है

तो मन को

प्रेम से

रंग दो,


मैं रंगी हूँ

इन रंगों में

आ तू भी रंग दे

इस मन को


आओ इस

अच्छाई से

बुराई को

रंग दो


घुल-मल जाये

हम तुम ऐसै

कोई रंग

जुदा ना हो ।।




विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract