STORYMIRROR

Anmol Mago

Inspirational

4  

Anmol Mago

Inspirational

मिथ्या

मिथ्या

2 mins
873

ख़ूबसूरती के नए व्याख्यान

ढूंढते - ढूंढते,

हम अक्सर भूल जाते हैं,

उस हीनता को जो हर

दिल में पनपती है। 


हम भूल जाते हैं,

उन संकरी धूल जमी

तंग गलियों को ,

जहाँ से गुज़रते चेहरों पर,

पसीना अंगार बनकर दहकता है। 

जो किसी आदत की तरह ,

बार - बार निराशा और

उम्मीद के जाल में गोते खा रहे हैं। 


और जो सुबहो शाम भटकते हैं ,

इन नीम बाग़ शहरों में ,

और फिर किसी थके हारे

मुसाफिर की मानिंद लौट जाते हैं,

किसी प्रगाढ़ रहस्य में

जो इस सभ्यता की समझ से परे है। 


श्रृंगार के नए गीत रचते- रचते ,

हम भूल जाते हैं कि

महकते रुकों और

अमीर मयखानों से परे,

एक पूरा वीरान संसार है,

जो खड़ा है हमारे सामने

एक प्रश्नवाचक कि तरह ,

जिसे हम ख़ूबसूरती के

क़ालीन तले ढक देना चाहते हैं। 


मगर प्रेम से तड़पते युवकों,

और इतिहास कि विरासत से दूर ,

एक वर्तमान है, जहाँ न गुल है,

ना प्रेम है, न कोई दया,

है तो बस चंद काँपते हाथ

ओझल आँखें और

एक सहमी हुई आवाज़, 

जो सच कह देना चाहती है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational