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Kirti Pandey

Inspirational

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Kirti Pandey

Inspirational

मिलन की आस

मिलन की आस

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माँ दुर्गा प्राचीर है, प्रचंड है,  सृष्टि का आधार है 

त्रिशूल हाथ में लिए असंख्य शक्ति से भरी माँ शक्ति का स्वरूप हैं,

माँ पूज्य वंदनीय है, उमंग है, तरंग है

माँ ज्वाला -सी प्रचंड हैं विभिन्न रूप का हो के भी माँ तो अखंड है 

प्रज्वल्यमान ज्योति से मिलने की आस है

हर मन है व्याकुल निहारता जो बाट है 

प्रसन्नता है, तेज है ललक है दरस पाने की माँ करुणा है, 

ममता है असहारे कि आशा है

माँ हर्ष है, उत्कर्ष है हर बेटी का आदर्श है 

मन सोचता है माँ आएगी तो देखें या उसमें ही खो जाए 

पुछेंगे हम माँ, क्या तेरी गोद में सो जाएँ

और खो जाएँ माँ की प्रज्वलन आंखों में

वेदना देख आँखें भर गयी मेरी पलक झपकाए न बने

आँसुओं की बारिशें हो रही मैं सोचती सी रह गयी 

जब एक आहट सी महसूस हुई पता चला वो माँ ही थी

मिलन जो था वो हो चुका है उसी ही अश्रु भाव में तो माँ का प्यार था छुपा


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