उदास जिंदगी
उदास जिंदगी
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हर पल कोई आसपास है
फिर भी मन घटने लगता है
क्यों कभी-कभी,
जिंदगी उदास-सी हो जाती है?
सब कुछ अंदर ही अंदर
चुपचाप सिमटने लगता है
क्यों कभी-कभी,
रूह बेजान-सी हो जाती है
तनहाई में खुशी मिलती नहीं
ग़म का इजहार होता नहीं
क्यों कभी-कभी,
जुबां बेजुबान हो जाती है
बाँट कर एक-एक खुशी
हर जगह को महकाया मैंने
क्यों कभी-कभी,
जिंदगी सुनसान हो जाती है
हौसले बड़े हो भी गए तो क्या
मुश्किलें छोटी होती नहीं
क्यों कभी-कभी,
जिंदगी इम्तहान हो जाती है।
