मेरे तुम हो मीत
मेरे तुम हो मीत
तुम मेरे हो मीत प्रिया अब,
तुम हो गीत हमारे।
अर्ध -अंग का भाग्य मिला है,
मिला तुम्हे फल सारे।।
तुम हो सृजनी भाग्य-विधाता,
अच्छे घर की गृहणी।
है अधिकार सभी भी तुमको,कर्म,
धर्म की करणी।।
तुम हो सती इंदिरा जग की,
सब पग-पडे़ तुम्हारे।
अर्ध-अंग का भाग्य मिला है,
मिला तुम्हे फल सारे।।
गौरी प्रिया तुम्ही भोला की,
विष्णु प्रिया जग जाने।
दशमुख प्रिय रानी मंदोदरि,
नही दशानन माने।।
हित की बात रही समझाती,
मृत्यु सदा ललकारे।
अर्ध-अंग का भाग्य मिला है,
मिला तुम्हें फल सारे।।
अंत समय तक बन उद्दारक,
महिमा सिया बताती।
तुच्छ सैन्य अंगद हनुमत की,
सूर गान वह गाती।।
जब सेना में इतना दम है,
राम प्रवल निरुआरे।
अर्ध-अंग का भाग्य मिला है,
मिला तुम्हे फल सारे।।
