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Renu Singaria

Abstract

3  

Renu Singaria

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मेरा जीवन सत्य

मेरा जीवन सत्य

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सोचे थे जो, चाहे थे जो, सपने,

माने थे जो, लगे थे जो, अपने,

जाने थे जो, दर्द मन के,

किये थे जो, कर्म तन मन धन से,

वो सब कुछ झूठ निकले,

जो कल्पनाये थी, जो सत्य थे, जीवन के

वो सब छलावा निकला,

बस वो अदृश्य रब है या तुम हो और,

ये प्रेम ही सच है सत्य है जीवन का।


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