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अनिल कुमार निश्छल

Inspirational

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अनिल कुमार निश्छल

Inspirational

मेहनत से सब कुछ मिलता है

मेहनत से सब कुछ मिलता है

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वक़्त बुरा हो तो सब तन्हा छोड़ देते हैं

कुछ अपने अपनों से रिश्ते तोड़ देते हैं।


एक जैसा वक़्त सबका नहीं रहता साहिब

कुछ लम्हें मंजिल की ज़ानिब मोड़ देते हैं।


सूरज ढलकर ही तो रोज़ उगा करता है

रोशनी उन्हें मिलती जो अंधेरा ओढ़ लेते हैं।


पशु-पक्षी, कीट-पतंगे दिन-रात लगे रहते

बाढ़ से टूटा घर धीरे-धीरे जोड़ देते हैं।


घर बैठे-बिठाए जो कोसते हैं क़िस्मत को 

आता है जब परिणाम माथा फोड़ लेते हैं।


कितनी मशक्कत से ? मधुमक्खी शहद बनाती है

बहुत सिखाती हमको कैसे-कैसे ? दौड़ लेते हैं।


आँखों में ख़्वाब, दिल में जुनूं गर पाले "निश्छल"

करामात भी करते हैं ज़माने को पीछे छोड़ देते हैं।


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