Sohan kumar
Abstract
ज़ुबान फिसलने लगती है
और लफ्ज़ थिरकने लगते हैं
जब मैं मदहोशी में हँसता हूँ
कई ज़ख्म बिलखने लगते हैं !
रात
कृष्ण
मोहब्बत
इश्क़
मदहोशी
गुफ्तगू कभी खुद से भी किया कीजिए जनाब ख़ैर जो होना है वो तो होना है ! गुफ्तगू कभी खुद से भी किया कीजिए जनाब ख़ैर जो होना है वो तो होना है !
आंचल में अपने रखलो हमें बस चाह हमारी है, इतनी सी। आंचल में अपने रखलो हमें बस चाह हमारी है, इतनी सी।
जीवन में कई विचारों के रंग भरतीं है तस्वीरें जीवन में कई विचारों के रंग भरतीं है तस्वीरें
जहाँ पेड़ों को भी अपना माना जाता है जहाँ नहीं विचलित होता मुसीबत आने पर कभी मन जहाँ पेड़ों को भी अपना माना जाता है जहाँ नहीं विचलित होता मुसीबत आने पर ...
अपना अपना करता है मन कुछ नहीं है अपना रे। अपना अपना करता है मन कुछ नहीं है अपना रे।
दिल के सुकून के लिए कहती हूँ शेर मैं तमगे पे या ख़िताब पर मेरी नज़र नहीं। दिल के सुकून के लिए कहती हूँ शेर मैं तमगे पे या ख़िताब पर मेरी नज़र नहीं।
सावन का महीना ,बारिश की फुहार सखियों का संग ,ठंडी ठंडी चले बयार ! सावन का महीना ,बारिश की फुहार सखियों का संग ,ठंडी ठंडी चले बयार !
आओं मिलकर प्रण करें धरती को हरी - भरी और खुशहाल बनाए। आओं मिलकर प्रण करें धरती को हरी - भरी और खुशहाल बनाए।
और अगर आ गया रास्ते में तो डर कर रास्ता मुकर जाएगा भारतवर्ष फ़िर सज जाएगा। और अगर आ गया रास्ते में तो डर कर रास्ता मुकर जाएगा भारतवर्ष फ़िर सज जाएगा...
पर नहीं पहुँच पाएँगे हम, तेरी डोरी में जोर नहीं। पर नहीं पहुँच पाएँगे हम, तेरी डोरी में जोर नहीं।
पर मन के कोने में एक दर्द सताता रहा और मन को नहीं मिली संतुष्टि! पर मन के कोने में एक दर्द सताता रहा और मन को नहीं मिली संतुष्टि!
आओ मिलकर कसमें खाओ, रखेंगे भारत का मान देखो ये है हिंदुस्तान...। आओ मिलकर कसमें खाओ, रखेंगे भारत का मान देखो ये है हिंदुस्तान...।
जो भी गया सार्वभौम आचरण तक वो रहा इतिहास के पन्नों की धूल तक। जो भी गया सार्वभौम आचरण तक वो रहा इतिहास के पन्नों की धूल तक।
मानवता रक्षण को चाहिए बस एक सच्चा इंसान नहीं चाहिए इसे सिक्ख,ईसाई -हिंदू न मुसलमान। मानवता रक्षण को चाहिए बस एक सच्चा इंसान नहीं चाहिए इसे सिक्ख,ईसाई -हिंदू न मु...
ऐसी भूमि हमारी आन बान शान है.. हमारे वतन की भूमि हमारी आन बान शान है। ऐसी भूमि हमारी आन बान शान है.. हमारे वतन की भूमि हमारी आन बान शान है।
जान गँवाई सरहद पर वीरों ने ऐसे वीरों का है यह भारत देश। जान गँवाई सरहद पर वीरों ने ऐसे वीरों का है यह भारत देश।
मैं हूँ इस भारत की स्वतन्त्र नागरिक, आओ कुछ बातें दिखलाऊँ। मैं हूँ इस भारत की स्वतन्त्र नागरिक, आओ कुछ बातें दिखलाऊँ।
राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाये। पर सीता की पीर को ना समझ पाये। राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाये। पर सीता की पीर को ना समझ पाये।
"माना आपकी रचनायें अच्छी हैं,मगर दिक्कत ये है कि सच्ची हैं! सच तो आजकल बिकता नहीं है! "माना आपकी रचनायें अच्छी हैं,मगर दिक्कत ये है कि सच्ची हैं! सच तो आजकल बिकता ...
स्वर्ण पिंजरो में रखे मुफ्त के दानों में भी, वो बात कहाँ ? स्वर्ण पिंजरो में रखे मुफ्त के दानों में भी, वो बात कहाँ ?