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KAVY KUSUM SAHITYA

Abstract

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KAVY KUSUM SAHITYA

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मौसम और पर्यावरण

मौसम और पर्यावरण

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मंथन होता जब सम्पूर्ण शक्ति

साहस कि भक्तिसाथ साथ

मिलते हैं युग को मूल्यवान उपायोगी

शस्त्र शास्त्र धन धान्य के साधनके उपहार


धन्वंतरि, लक्ष्मी भी सागर मंथन के

सत्य सत्यार्थ युग वैभव के साधन साध्य

आज अवश्यक युगसार्थकता कि

संयुक्त शक्ति कि हस्ती हो साथ


युगउत्कर्ष विकास मानवता के मूल्य के

फिर चिंतन का मंथन हैंअपरीहार्य

स्वच्छ मन मस्तिष्क, स्वच्छ अवनी आकाश,

पर्यावरण का संरक्षण स्वच्छ संवर्धन संस्कार

जल ही जीवन, वन ही जीवन, का अलख जगाए


कुछ को नसीब यूरों वाटर,

कुछ को ज़ीरो वॉटर,

पीयच वॉटर, बहुत बद नसीब

देश में पीते रोज गटर वॉटर


आज विवश है सागर मंथन का

धन्य धरोहर धन्वंतरि

भगवान सेहत स्वास्थ्य का विधि

विधान किस औषधि का करे निर्माण


जब युग में जीव जीवन का स्वयं कर रहा नाश

वर्षा भी अब सिमट गई सूर्य भी

हर सुबह वर्तमान युग मूल्यों पे शर्माता है

ऋतुयों ने चाल बदल दी प्रकृति ने परिवार बदला

युग मानव का संस्कृति संस्करण संस्कार बदला।


युग मानव की सेहत ना जाने

कई बीमारियों से कंगाल बना

आशा और विश्वास का हो उजियारा,

ना धरा पर कही रहे अँधेरा ना हृदयों में अंधकार


अहंकार मिटाओ घृणा, द्वेष दंभ मिटाओ भय,

भूख भ्रष्टाचार का भयंकर दैत्य भगाओ

पर्यावरण बचाओ सृष्टी की दृष्टि

युग वर्तमान भविष्य बचाओ।


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