STORYMIRROR

Arti Kumari

Tragedy

4  

Arti Kumari

Tragedy

मैं सोई नहीं कई रातों से

मैं सोई नहीं कई रातों से

1 min
244

मैं सोई नहीं कई रातों से

कुछ सपने मुझे जगाते हैं

कुछ शूल चुभे हैं दिल में ऐसे

जो पथ पर मुझे चलाते हैं

दिल आहिस्ता से रोता है

पर मन का धीर न खोता है

कुछ कहते मुझको सनकी हैं

कुछ कहते हैं पगलाई है

कुछ ज्ञान बांटते हैं मुझको

अरे! इन सपनों के चक्कर में

क्यूं तूने अपनी जान फंसाई है?

तुम हंस लो जितना हंसना है

ताना कस लो जितना कसना है

मुझे नींद अभी ऐसे नहीं आएगी

जब तक हर ज़िद पूरी न हो जाएगी

माना इन सपनों ने मेरी नींद चुराई है

पर इन्हीं सपनों ने ही तो मुझको

जीने की नई राह दिखाई है

जीने की नई राह दिखाई है!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy