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Rabindra kumar Sahoo

Inspirational

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Rabindra kumar Sahoo

Inspirational

मैं हूं इन्सान

मैं हूं इन्सान

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मेरा नहीं कोई जाती

नहीं कोई धर्म

मैं हूं इन्सान

येेेही है मेरी पहचान ।

धन, मान, गर्ब, अहंकार

नहीं इन्सान की और

इन्सानियत की पहचान

जीना मरना

हर किसी की साथ

मेरा इन्सानियत को योडना

मेरा यही है पहचान

मैं हूं इन्सान ।

प्यार, मोहब्बत से जीना

ज़िंदगी की है अगला पहचान

मैं हूं इन्सान। 

हर किसी की साथ देना

हर किसी की सुखद दुःख मैं

अपने आप को 

साथ देने का नाम ही

ज़िंदगी है

यही मेरी पहचान है

क्योंकि मैं हूं इन्सान ।

दिल और दिमाग से

काम लेना

हर किसी के

दिल को पहचाना

मेरा ही काम है

हर किसी की ज़िंदगी की

गम निकलने और

गम को दूर करने का नाम 

मेरा ज़िंदगी है

यही है मेरी पहचान

मैं हूं इन्सान ।

हर घड़ी मैं हर मुसीबत मैं

लोगों की साथ खड़ा होना

हर इन्सान की मदद करना

हर इन्सान की साथ देना

बुरे समय पर और

बुरे वक्त मैं हर किसी की

साथ देने का नाम ही

ज़िंदगी है

यही मेरी पहचान

क्योंकि मैं हूं

हर हाल मैं एक

सभ्य, शिक्षित, 

सामाजिक प्राणी         

मैं हूं इन्सान।

इन्सानियत की नाम पे

मैं हूँ एक इंसान

नहीं मेरा कोई स्वार्थ

नहीं मेरा कोई अर्थ

देश की सेवा

गरिब जनता की सेवा

मेरा पहला धर्म है

मैं सोचता हूं 

ज़िंदगी ही सेवा है

ज़िंदगी है

सेवा की पहचान

मेरा देश, मेरा देश भक्ति

मेरी पहचान

क्योंकि मैं हूं पहले

एक इंसान 

इन्सानियत मेरी पहचान है

मैं हूं इन्सान ।


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