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Amit Singhal "Aseemit"

Inspirational

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Amit Singhal "Aseemit"

Inspirational

मैं अमित हूं

मैं अमित हूं

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मेरा ना आर है, ना पार है,

मैं अपार हूं।

मेरा ना आदि है, ना अंत है,

मैं अनंत हूं।

मैं अमित हूं। 


मुझे ना बांध पाई, कोई सीमा है,

मैं असीम हूं।

मुझे नहीं रख पाया, कोई सीमित है,

मैं असीमित हूं।

मैं अमित हूं।


ना किसी बात का शोक है, सदैव ही रहता,

मैं पुलकित हूं।

ना किसी का डर है, ना किसी बात का भय है,

मैं प्रफुल्लित हूं।

मैं अमित हूं।


जो मैंने पाया है, स्वयं की उपलब्धियों पर,

मैं गर्वित हूं।

परिवारजनों के सिर पर, एक मुकुट की भांति,

मैं शोभित हूं।

मैं अमित हूं।


स्वयं ईश्वर के आशीष से, एक काव्य की भांति,

मैं रचित हूं।

दूसरों की प्रसन्नता में, सदैव स्वयं को पाता,

मैं हर्षित हूं।

मैं अमित हूं।


मैं ना अजर हूं, ना अमर हूं, पर अभी,

मैं जीवित हूं।

अपने जीवन से, दूसरों को करता,

मैं प्रेरित हूं।

मैं अमित हूं।


ईश्वर की विशेष इच्छा द्वारा,

मैं निर्मित हूं।

सत्कर्मों हेतु स्वयं ईश्वर द्वारा,

मैं चिंहित हूं।

मैं अमित हूं।


प्रत्येक कार्य करने हेतु रहता,

मैं उत्साहित हूं।

दूसरों को प्रेरणा देकर करता,

मैं प्रोत्साहित हूं।

मैं अमित हूं।


प्रकृति के प्रत्येक कण में,

मैं निहित हूं।

समय के प्रत्येक क्षण में,

मैं उपस्थित हूं।

मैं अमित हूं।


मेरी ना हार है, ना जीत है,

मैं अजीत हूं।

हर कोई मेरा, और हर किसी का,

मैं मीत हूं।

मैं अमित हूं,


खुशियों में गाया जाने वाला,

मैं गीत हूं।

सब मुझे प्यारे, और मैं सबका प्यारा,

मैं प्रीत हूं।

मैं अमित हूं।


शुभ अवसर पर निभाई जाने वाली,

मैं रीत हूं।

सुर ताल संग बजाया जाने वाला,

मैं संगीत हूं।

मैं अमित हूं।


गुरुजनों से स्नेहाशीष पाने के लिए,

मैं गौरांवित हूं।

मित्रों के हृदयों में सदैव के लिए,

मैं मुद्रित हूं।

मैं अमित हूं।


कभी समझ ना आने वाला,

मैं गणित हूं।

दूसरों की पीड़ा से हो जाता,

मैं द्रवित हूं।

मैं अमित हूं।


मेरा ना आर है, ना पार है,

मैं अपार हूं।

मेरा ना आदि है, ना अंत है,

मैं अनंत हूं।

मैं अमित हूं।


मैं असीमित हूं।

मैं अमित हूं।



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