मानवीय मूल्यों पर दोहे
मानवीय मूल्यों पर दोहे
सत्य अहिंसा प्रेम को, मूल-मंत्र लो मान।
अपनाएगा जो इसे , पाएगा सम्मान।।
दया भाव मन में रहे, वह सच्चा इंसान।
पशुवत जीवन जी रहे, वे सब हैं नादान।।
जिसे जरूरत हो सखे, देना नित सहयोग।
सम्भव है इस कर्म से, मिट जाए दुर्योग।।
निंदा चुगली मत करो, बहुत बड़ा यह पाप।
जानें कब ये पलट कर, बन जाए अभिशाप।।
धीरज कभी न छोड़ना, बढ़ते रहना मीत।
मंजिल भी मिल जायेगी, बजे मधुर संगीत।।
गुरुजन की सेवा करो, तज कर निज अभिमान।
प्रतिफल इसका है सुखद, यह वेदों का ज्ञान।।
करुणा जिसके मन बसे, वह नर देव समान।
ऐसे नर पर तो सदा, खुश रहते भगवान।।
धीर वीर बन कर रहे, मिलती उसको जीत।
करें प्रशंसा लोग सब, देते उसको प्रीत।।
दान सदा करते रहो, सद्गुण है यह नेक।
निर्धन पर किरपा करो, रख ईश्वर पर टेक।।
मधुर वचन बोलो सखे, बढ़ती इससे प्रीत।
मान बड़ाई भी मिले, जीवन बने पुनीत।।
