STORYMIRROR

Murari Pachlangia

Inspirational

4  

Murari Pachlangia

Inspirational

मानवीय मूल्यों पर दोहे

मानवीय मूल्यों पर दोहे

1 min
235

काम क्रोध मद लोभ की, अति से बचना मित्र।

जो ना माने बात यह, बिगड़े सकल चरित्र।।


ईर्ष्या कभी न कीजिए, बढ़ता इससे बैर।

बैर भाव में कब कहाँ, रही किसी की खैर।।


चोरी करना पाप है, कभी न करना मीत।

खुलती है जब बात ये, घट जाती है प्रीत।।


निंदा चुगली मत करो, बहुत बड़ा यह पाप।

जानें कब ये पलट कर, बन जाए अभिशाप।।


जहाँ जरूरत हो नहीं, मीत रहो चुपचाप।

बिना बात मत बोलना, बढ़ जाता संताप।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational