माँ......
माँ......
माँ तू है परम पूज्य
तू ही है सबसे अमूल्य।
तू ही मेरा विश्वास
तू ही सबसे ख़ास।
करती है सदैव इन्साफ़
तुझ को मेरा आभार।
तू कनक सी सुंदर है
तू प्यार का समंदर है।
तेरा प्यार ही मेरा संसार
तूने दिए सारे संस्कार।।
तूने मुझे सम्भाला है
मुझे प्यार से संवारा है।
तरे ममता की छाया है
तू ही मेरा साया है।
तूने मुझे जनम दिया है
तूने ही सच्चा प्रेम किया है।
तूने ही है गुणवान बनाया
मुझे अच्छा इंसान बनाया l l
कैसे ममता का मोल चुकाऊँ
अपने प्रेम का इझार करूँ।।
जब जब मुश्किलों ने घेरा है
बस तुझे दिल से पुकारा है।
माँ तेरा हृदय कनक समान
तेरा आँचल पुष्प समान।
माँ तुझपे है अभिमान
तुझमें है गीता का ज्ञान।
तेरी पूजा हम करते हैं
दिल में तुझे रखते हैं।
ना उतार पाएँगे क़र्ज़ तेरा
नहीं है दूजा तुझ जैसा।
