मां
मां
मैने उसकी मोहब्बत में मिलावट न पाई है
उसने तो इतनी शिद्दत से मोहब्बत को लुटाई है
हम देर से घर पहुंचे ओ हम पर गुस्सा दिखाईं है
गुस्से के साथ ओ थाली में खाना लेकर आई है
हमारे पास बैठ कर हमको बहुत चिल्लाई है
अपने हाथों से उसने रोटी का निवाला खिलाई है
हमारे घर से निकलते ही एक आवाज तेजी से आई है
आराम से जाना रात होने से पहले घर चले आना है
ओ प्यार ही कुछ इस तरह हमसे करती आई है
मंदिर में जाते ही हमारे लिए दुवा करके आई है
उसने तो कुछ लिए बिना ही कीमती प्यार लुटाया है
वो मां है उससे हमेशा हमने निस्वार्थ प्रेम पाया है
उसकी वजह से हमारी आंखों में आंसू न आया है
हम गुस्से में भी बोले उसने तो प्रेम से समझाया है
मां तेरे प्रेम को मै जितना लिखूं लिख न पाऊंगा
तुझमें मुझे लिखा तुझे क्या ही मै लिख पाऊंगा..
