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ritesh deo

Inspirational

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ritesh deo

Inspirational

माँ

माँ

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"माँ"

न खूबसूरत नशीली आँखें है तुम्हारी, 

न लहराती जुल्फे है तुमने पायी,

न शरबती होंठों की रंगत है गुलाबी, 

फिर भी

तुम इतनी सुंदर कैसै हो ?


दया, प्रेम,करूणा से भरी तुम्हारी आँखे,

मीठे स्नेह भरे शब्द टपकाते ये होंठ, 

प्यार बरसाती ये हसीन जुल्फे, 

शायद इसीलिए, 

हाँ, शायद इसीलिए


माँ ,तुम सबसे सुन्दर हो ...


न गोरी नाजुक बाँहे तुम्हारी, 

न कमर बलखाती है,तुम्हारी ,

न सौंदर्य अदभुत आभा लिए हुए है,

फिर भी,

तुम इतनी सुंदर कैसै हो ?


वात्सलय से भरी तुम्हारी बाँहे,

ममता लुटाता तुम्हारा आचँल,

प्यार बरसाता तुम्हारा दिव्य चेहरा,

शायद इसीलिए, 

हाँ, शायद इसीलिए


माँ ,तुम सबसे सुन्दर हो.



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