माॅं चन्द्र घंटा की महिमा
माॅं चन्द्र घंटा की महिमा
छाया है जीवन में घना अन्धेरा ।
मैया कर दे मेरे जीवन में उजियारा ।।
तृतीय नवरात्रि में माँ अम्बे ।
सिंह पर सवार होकर आजा ।
लेकर रुप चंद्र धन्टा का।।
मस्तक पर बिराजे तेरे अर्ध चंद्र धंट।
हाथों में साजे है अस्त्र शस्त्र ।।
माँ तेरे रुप अलौकिक ।
तु कल्याणी , परमशांति दायिनी।।
शंखनाद से सब शत्रु है भागे।
मन से कलुषित विकार भी भागे।।
कर देता है मन को एकाग्रचित्त।
जब करु नो- दिनो तक तेरी भक्ति ।।
जागृत होती है मुझ में अनंत शक्ति।।
हे मैया ऊॅंचे भवना वाली ।
हाथ जोड़ करुँ मैं तेरा वन्दन ।
मेरे धर सदा विराजो ,
है तुम्हारा मैया अभिनंदन।।
