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घनश्याम सोनी

Abstract Others

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घनश्याम सोनी

Abstract Others

क्या हुआ मुझे है?

क्या हुआ मुझे है?

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क्या हुआ मुझे है?


थक चुका या हार गया, गिर चुका या गिर रहा,

जो साथ थे वो छोड़ गए, जो साथ हैं वो छोड़ रहे।

हो चुका दूर मैं खुद से हूँ, या सूक्ष्म हूँ मैं हो रहा,

लड़ रहा खुद से खुद में मैं, या खुद में खुद को ढूंढ रहा?


किसी के लिए मैं चंद्र बना, तो कोई मुझे सूरज कहता,

कोई रचता कविताओं में, किसी के लिए कण मात्र रहा।

राह नहीं दिखता मुझको, मंजिल भी धुंधला धुंधला है,

पूछूं गर औरों से रास्ता, तो झार झुरमुट क्यों दिखता है?


क्या हुआ मुझे है?


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