कर्मों की वैतरणी
कर्मों की वैतरणी
छल-कपट हो तो कैसे पार करें वैतरणी
छल-कपट से जीवन का पथ अंधकारमय हो जाता है,
सत्य की ज्योति ही हर बाधा को मिटा पाती है।
मन में हो यदि लोभ और वाणी में हो झूठ,
तो वैतरणी बन जाती है दुःखों का अथाह समुद्र।
सत्य को अपनाओ, प्रेम का दीप जलाओ,
दया और सेवा से जीवन को सजाओ।
क्षमा को अपना आभूषण बनाओ,
ईश्वर का नाम हर पल गुनगुनाओ।
जब कर्म होंगे निर्मल, हृदय होगा पावन,
तब सहज ही पार होगी वैतरणी जीवन।
दीपांजलि DeepaBen shimpi
संदेश:
"छल-कपट नहीं, सत्य, प्रेम और सद्कर्म ही जीवन की वैतरणी पार कराते हैं।"
